उल्हासनगर मनपा का अजब कारनामा…
लॉकडाउन पिरियड में इमारत को निष्कासन करने की नोटिस…
इमारतों के रहिवासी लामबंद हुये, फिर गर्माया धोकादायक इमारतों का मुद्दा…
उल्हासनगर की धोकादायक इमारतें, जो खाली करवाई या सील की गई सैंकड़ों इमारतों को खुद रिपेयर करे मनपा या फिर इमारतवासीयों को रिपेयरिंग की परमिशन दे, ऐसी मांग हरबार की जाती रही है,
ज़िंदगी भर मनपा ने इमारतों से टॅक्स लिया है, मनपा का कर्तव्य बनता है कि धोकादायक इमारतवासीयों का पुनर्वसन करे,
वो करने के अलावा उल्हासनगर मनपा का अजीब ही कारनामा देखने मिला,
कोरोना महामारी की वजह से केंद्र और राज्य सरकार द्वारा लॉकडाउन पिरियड 31 जुन 2020 तक घोषित है,
लॉकडाउन पिरियड में 28 मई 2020 के दिन उल्हासनगर की अनेकों धोकादायक इमारतों को नोटिस चिपकायी गयी ये लिखते हुये कि आपकी इमारत को आप स्वयम निष्कासन करें, 7 दिन बाद मनपा निष्कासन करेगी तो उसका खर्च आपसे लिया जाएगा, पहली बात तो अधिकतर इमारतें सील है, उनके रहिवासी कहीं और जगह रहते है उन्हें पता ही कैसे चलेगा कि इमारत में चुपचाप नोटिस चिपकायी गयी है, जैसे तैसे कुछ इमारतवासीयों को पता चला तो चर्चाओं का बाज़ार गर्म हुआ सभी लोगों ने ध्यान देना शुरू किया, उतने में उल्हासनगर मनपा द्वारा कुछ इमारतों को दुसरी नोटिस 3 जुन 2020 को चिपकायी गयी, जिसमे लिखा था कि, आप अपनी इमारत को किसी स्थापत्य अभियंता आर्किटेक्चरल इंजीनियर को दिखाइए और इमारत को खुद ही रिपेयर करवाइये,
उल्हासनगर मनपा द्वारा लॉकडाउन पिरियड में सब बन्द होने के बावजुद, बरसात के मौसम को देखते हुये अपना पल्ला झाड़ने के इरादे से दी गयी नोटिस को देखते ही इमारतों के रहिवासी लामबंद हुये, कल 8 जुन को उल्हासनगर मनपा आयुक्त से समाजसेविका काजल मुलचंदानी के माध्यम से मुलाकात करके अम्बिकासागर और शिवगंगा अपार्टमेंट के इमारतवासियों ने अपनी व्यथा बताई, और अपनी इमारतों को खुद ही हम रिपेयर करेंगे, हमें परमिशन दी जाये, ऐसी मांग दोहराई गयी।
लॉकडाउन पिरियड में ऐन बरसात के सामने इमारत को निष्कासन करने की नोटिस मिलने से असमंजस में आये इमारतवासीयों की चिंता के कारण धोकादायक इमारतों का मुद्दा फिर से एक बार गर्माया।

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Sappho, spelled (in the dialect spoken by the poet) Psappho, (born c. 610, Lesbos, Greece — died c. 570 BCE). A lyric poet greatly admired in all ages for the beauty of her writing style.

Her language contains elements from Aeolic vernacular and poetic tradition, with traces of epic vocabulary familiar to readers of Homer. She has the ability to judge critically her own ecstasies and grief, and her emotions lose nothing of their force by being recollected in tranquillity.

Marble statue of Sappho on side profile.

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